by - Praveen Bhatt

14 Jul 2020


उत्तराखंड

हल्द्वानी से सुंदर धामी की रिपोर्ट  :धारचूला मुख्य बाजार से 8 किलोमीटर पहले गलाती आता है। गलाती क्षेत्र में तकरीबन 10-12 गाँव हैं। उनमें से अधिकतर गाँवों का संपर्क पिछले 3 दिनों से भारी बरसात के कारण पूर्ण रूप से कट चुका है। गाँव वालों ने जैसे तैसे एक कामचलाऊ पुल बनाने का प्रयास तो किया है, पर यह पुल अगली बरसात को सह पाएगा इसके आसार नहीं है।उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं का अभाव कोई नया मसला नहीं है। सरकार से लेकर हर आम जन इस अभाव से परिचित है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में ही मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिलती है, और फिर उससे 90 किलोमीटर दूर धारचूला तहसील के एक छोटे से गाँव में गाँववासी जिस स्थिति में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं वह सोच से परे हैं।3 दिन पहले सभी जगहों पर भयानक बारिश का प्रकोप देखने में मिला था।  गाँव गलाती में भी भयानक बारिश हुई, जिससे काली नदी की एक सहायक नदी में उफान आ गया। गलाती क्षेत्र में अनेक गाँव इसी नदी के दोनों ओर बसे हैं। नदी में उफान आने से जितने मानव निर्मित पुल थे, सब नदी के बहाव में बह गए। और स्थिति यह हुई कि गाँव का बाजार, तहसील मुख्यालय, व प्रमुख सड़क से कनेक्शन कट गया।सुंदर धामी बताते हैं कि इस तस्वीर को उन तक पहुँचने में तीन दिन लग गए,गलाती के ऊपरी क्षेत्र में (जहाँ उनका गाँव है) वहाँ आपको फोन का नेटवर्क मिलना समुद्र में मोती मिलने जैसा है। हाँ, 2020 के डिजिटल भारत में मेरा गाँव अभी भी मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहा है। गाँव में फोन मुश्किल से लग पाता है, और ऐसे में इंटरनेट चलने की उम्मीद करना है बेमतलब है। इंटरनेट से जुड़े किसी भी कार्य के लिए गाँव से युवाओं को 8 किलोमीटर दूर गलाती या फिर वहाँ से आगे और 8 किलोमीटर धारचूला आना पड़ता है। तो हुआ कुछ यूं कि, भयानक बारिश होने के बाद गाँव पूरी तरह से कट चुका था। पर मोबाइल नेटवर्क ना होने के कारण सूचना पहुंचाना भी अपने आप में एक चुनौती बन चुकी थी।कल गाँव वालों द्वारा एक स्थायी पुल बनाया गया जिसके बाद धारचूला आकर देवेंद्र धामी ने ये तस्वीर वट्सएप की। उसके बाद कॉल किया। कॉल उठाते ही दर्द भरी आवाज में उनका कहना था कि “यार संजू 3 दिन से इतना परेशान हैं हम लोग, किससे कहें कैसे कहें कुछ समझ नहीं आता।“पहाड़ में आसूं बस यही नहीं थमते, परेशानी बस इतनी ही नहीं है। 2016-17 में गलाती क्षेत्र में ’हाट से धामी गाँव’ (8 किलोमीटर) के लिए एक सड़क परियोजना का काम शुरू हुआ। 2018 में पहाड़ कटाव के बाद रास्ता तो बना दिया और सड़क का कार्य छोड़ दिया। 2018 से वो कच्ची सड़क ही है। यह सड़क मेरे गाँव से दूसरे छोर में नदी पार करके हैं। तो अब पुल टूट जाने के बाद तो मेरे गाँव पूरी तरह से कट गया है, वही सड़क के साथ लगे हुए गाँव के लोगों के लिए भी कम चुनौतियाँ नहीं है। पुल टूटने की वजह से पारम्परिक पैदल मार्ग का प्रयोग तो किया नहीं जा सकता, तो इसी कच्ची सड़क से अन्य गाँव के लोगों की आवाजाही चल रही है। पर बारिश की वजह से सड़क की मिट्टी बहने लगी है, सड़क के कोनों में बैरिकेडिंग भी नहीं है। पैदल चलने वाले व वाहन से आने जाने वाले हर किसी के लिए यह मार्ग खतरा बना हुआ है। सरकार ने ना पारम्परिक पैदल मार्ग को व्यवस्थित किया और ना ही सड़क के कार्य को पूरा जिससे आज गलाती के यह सभी गाँव बारिश के मौसम में अपने जीवन में दाँव में लगा कर जीवन यापन कर रहे हैं।रोजमर्रा की जरूरत, दूध बेचने, और अन्य व्यापारिक कार्यों के लिए गाँव से हर रोज़ धारचूला आने जाने वाले सभी लोगों के जीवन को एक झटका लगा है। और पहले से खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहे गाँववालों पर अगर ऐसे वक्त में बीमारी का कोई साया पड़ जाए तो ऐसा कामचलाऊ पुल पार करके फिर 8 किलोमीटर का खतरनाक रास्ता तय करके धारचूला पहुँचने से पहले किसी की जान चली जाए तो दोष प्रकृति को दिया जाएगा या प्रशासन की अनदेखी को?यह सब मैं हल्द्वानी में बैठ कर लिख रहा हूं। गाँव के इन्हीं हालातों के कारण हम भी पलायन का शिकार हुए हैं, पर अपनी पैतृक भूमि के प्रति एक जिम्मेदारी महसूस की जिस वजह से मैं मेरे सभी गाँव वासियों को एक आवाज देना चाहता हूं जो अपनी बात तक रख पाने में असमर्थ है। जितने भी मेरे गाँव वाले दूसरे शहरों में हैं और इस पोस्ट में पढ़ पा रहे हैं उम्मीद है आप अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, सभी पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी प्रकार से मदद पहुंचाई जा सकती है तो सुझाव दें।उपरोक्त विषय पर ग्रामवासी देवेंद्र धामी,प्रेम बिष्ट औऱ अन्य ग्राम वासियों द्वारा सरकार से अपील करी गयी हैं कि जल्द से जल्द बॉर्डर इलाके में बसे इन गाँव को संचार सुविधाओ से जोड़ा जाए औऱ पुल का निर्माण किया जाए।इस क्षेत्र में एक ही पुल है जो नहीं बहा है क्योंकि वह पुल नदी के ऊपर नहीं बनाया गया है।







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