by - Praveen Bhatt

15 Jun 2020


उत्तराखंड

प्रवीन कुमार भट्ट की रिपोर्ट

देहरादून। कोराना ने संकट ने दुनिया को एक नये मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिस ओर भी नजर पड़ती है एक तरह का सन्नाटा पसरा हुआ है। कल कारखाने और उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। शिक्षा और सेवा क्षेत्र ही नहीं पर्यटन उद्योग की भी कमर टूट चुकी है। आर्थिक रूप से रोजगार के जितने भी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं उन सब के बारे में खूब लिखा और बोला जा चुका है लेकिन अभी भी कुछ क्षेत्र हैं जिनके बारे में न तो कोई बोलने को तैयार है और न कोई उनकी बात सुन रहा है।

आपके दरवाजे पर रोज सुबह देश दुनिया की खबरें देकर जाने वाले समाचार पत्र वितरक भी इन दिनों इसी तरह की परेशानी से दो-चार हो रहे हैं। यहां तक कि कई समाचार पत्र वितरकों के लिए घर चलाना तक मुश्किल हो गया है।

देहरादून में न्यूज पेपर वितरकों के एकमात्र संगठन दून न्यूजपेपर एजेंट एसोसिएशन की मानें तो कोरोना के संकट ने उनके कारोबार को तबाह कर दिया है। यहां तक कि समाचार पत्रों की बिक्री भी लगभग 35 प्रतिशत घट गयी है। 1988 में पंजीकृत दून न्यूजपेपर एजेंट एसोसिएशन देहारादून का एकमात्र संगठन है जो समाचार पत्र वितरकों ने बनाया है। वर्तमान में इस एसोसिएशन की तीन शाखाएं पल्टन बाजार, मंडी और दया पैलेस धर्मपुर देहरादून से संचालित होती हैं। एसोसिएशन में कुल 390 समाचार पत्र वितरक पंजीकृत हैं और इन पंजीकृत वितरकों के नीचे सैकड़ों बीट ब्यॉय समाचार पत्र बांटने का काम करते हैं।

बिडम्बना यह है कि समाचार पत्रों ने दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी के समाचारों को बढ़-चढ़कर प्रकाशित किया और दुनिया को इस महामारी के खतरों के प्रति आगाह किया लेकिन वे कड़ी सर्दी, भयंकर बरसात और गर्मी के बीच घर-घर अखबार बांटने वाले अपने वितरकों और बीट ब्यॉयज को ही भूल गए। यहां तक कि न्यूज पेपर एजेंट्स और बीट ब्यॉयज को एक मास्क और सैनेटाइजर तक किसी संस्थान द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। इन एजेंट्स और बीट ब्यॉयज के कंधों पर अरबों का आर्थिक साम्राज्य खड़े करने वाले समाचार पत्र समाचार पत्र वितरकों को दो प्यार के बोल तक नहीं बोल पाए। चिराग तले अंधेरा वाली वो पुरानी और चर्चित कहावत एक बार फिर चरितार्थ हो उठी है।

दून न्यूज पेपर एजेंट एसोसिएशन के महासचिव ललित जोशी ने पहाड़नामा को बताया कि शहर के सभी शिक्षण संस्थान, स्कूल, कोचिंग संस्थान, होटल, शॉपिंग मॉल आदि बंद हैं। जिस कारण इन संस्थानों में समाचार पत्र भी नहीं जा रहे हैं। कोरोना काल में अब समाचार पत्र केवल घरों में ही जा रहे हैं। वहां भी लोगों में यह धारणा घर कर गई है कि समाचार पत्र के साथ कोरोना भी घर पर आ रहा है। जिस कारण बड़ी संख्या में लोगों ने समाचार पत्र बन्द करा दिए हैं।

एसोशिएशन के अध्यक्ष प्रदीप रतूड़ी ने पहाड़नामा से कहा कि समाचार पत्रों की संख्या घटने से एजेंट्स का काम बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। उन्होंने बताया कि समाचार पत्र घटने से एजेंट्स की आय तो घट गई है लेकिन बीट ब्यॉय को पूरे पैसे देने ही है। उन्होंने बताया कि किसी मोहल्ले में अगर केवल एक अखबार भी लगा है तब भी वहां जाना ही है। इस तरह समाचार पत्र घट गए हैं लेकिन दूरी तो तय करनी ही है।

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धवन व कोषाध्यक्ष हरप्रीत सिंह ने कहा कि न्यूज पेपर एजेंट्स की समस्याओं को लेकर बार-बार सरकार को भी अवगत कराया गया है लेकिन सरकार हमें श्रमिक मानने को ही तैयार नहीं है। एसोसिएशन के प्रचार मंत्री रमेश चन्द्र ने बताया कि श्रम विभाग में पंजीकरण को लेकर एसोसिएशन लंबे समय से संघर्ष कर रही है। उन्होंने बताया कि न्यूज पेपर एजेंट्स और बीट ब्यॉयज को श्रम विभाग में पंजीकृत करने हेतु सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। आशा है कि सरकार जल्द इस दिशा में कदम उठाएगी। ललित जोशी ने इसी बात पर जोड़ा कि सरकार हमें श्रम विभाग में पंजीकृत करने के लिए सैद्धान्तिक रूप से सहमत है। सरकार ने एसोसिएशन से जुड़े एजेंट्स के दस्तावेज भी मांगे हैं। आगे देखिए इस पर क्या कार्यवाही होती है। उन्होंने बताया कि हमारी एसोसिएशन हर स्थिति का सामना करने लिए संगठित है। धर्मपुर ब्रांच में हमारे साथी अजय शर्मा व राजेश पाल तथा मंडी ब्रांच में कमल राणा, हरीश आनन्द और भगत भंडारी सहित सभी साथी हमारे साथ खड़े हैं।

प्रदीप रतूड़ी फिर याद दिलाते हैं कि न्यूज पेपर एजेंट्स और बीट ब्यॉय सुबह 3.30 बजे से 9.00 बजे तक लगातार काम करते हैं। जब सर्द रातों, बरसातों में लोग अपने घरों में आराम कर रहे होते हैं तब समाचार पत्र वितरकों को प्रतिदिन काम करना होता है। उन्होंने अपील की कि इस कठिन समय में सामाजिक संगठनों, सरकार व समाचार पत्र मालिकों को समाचार पत्र वितरकों की परेशानी को समझते हुए उनकी मदद के लिए भी आगे आना चाहिए।







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