by - Praveen Bhatt

17 Jul 2020


उत्तराखंड

हिमदर्शन धूप से निकला स्वरोजगार का रास्ता

देहरादून से विनोद बगियाल की रिपोर्ट।

हिमालय की गोद में बसे द्वाराहाट के सीपी जोशी व गीता जोशी पहाड़ में स्वरोजगार की नई इबारत लिख रहे हैं। यह परिवार कुमाऊं अंचल के इस कस्बे में न सिर्फ अपना रोजगार चला रहा है बल्कि साथ में जुड़े 30 से अधिक परिवारों को भी इन्होंने राह दिखाने का काम किया है। सीपी जोशी ने 2017 में द यूनियन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को अलविदा कर द्वाराहाट में सुगंधित प्राकृतिक तत्वों से परिपूर्ण धूप बनाने का काम शुरू किया। देखते ही देखते तीन साल में ही इनका प्रोडक्ट हिमदर्शन धूप लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। देशी ही नहीं अब विदेशी लोग भी द्वाराहाट के हिमदर्शन धूप के प्रशंसक बन गए हैं। सीपी जोशी बताते हैं, ‘‘2017 में जब मैं द यूनियन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन से सेवानिवृत्त होकर द्वाराहाट लौटा तभी हमने हिमदर्शन नाम से धूप बनाने के काम की आधारशिला रखी।’’ जोशी ने बताया कि उन्होंने गांव के लोगों से बात की और उन्हें तुलसी, पाती, लैवंडर ग्रास, गिलोय आदि औषधीय पादपों की खेती करने के लिए तैयार किया।

हिमदर्शन धूप के पीछे की कहानी यह है कि ग्रामीणों को सुबंधित व औषधीय पादपों की खेती करने के लिए तैयार करने बाद श्री जोशी ने द्वाराहाट के निकटवर्ती गांवों मल्लीकहाली, तल्लीकहाली, छाटीना, बूंगा, रणा व कुंई की महिलाओं और पुरुषों को अनेक दलों में प्रशिक्षण के लिए टनकपुर व भवाली भेजा। आज प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ग्रामीण व औषधीय व संगंध पादपों की खेती कुशलतापूर्वक कर रहे हैं। इन्हीं पादपों का प्रयोग हिमदर्शन धूप को बनाने में किया जाता है। गीता जोशी बताती हैं, ‘‘ धूप के इस काम को स्थापित करने में महिलाओं का खूब योगदान है। अपने रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ महिलाएं औषधियों की खेती कर रही हैं। उन्हें अपने घरों में सुखाकर फिर उन्हें कारखाने तक लाती हैं।’’

जोशी जी के कारखाने में औषधियों को बारीक पीसकर महिलाओं को लौटा दिया जाता है। जिसे महिलाएं फिर गूंथकर धूप बनाती हैं। इसे वापस कारखाने लाकर पैकेजिंग का कार्य आगे बढ़ाया जाता है। यहां पर दो प्रकार की धूप का निर्माण किया जा रहा है। जिसे द्वाराहाट के दूनागिरी मंदिर, रुद्रप्रयाग के कालीमठ एवं उनके स्थानीय व्यापारियों को भेजा जाता है। हिमदर्शन धूप पाती, तुलसी, आम, पदम, आंवला, गिलोय, शुद्ध देसी गाय का गोबर आदि वस्तुओं से बनाया जाता है।कुछ समय पूर्व हिमदर्शन धूप का उत्तराखंड से बाहर भी विस्तार किया गया है। इसके लिए दिल्ली की एक संस्था फ्रेश पहाड़ी प्रोडक्ट दिल्ली में हिमदर्शन धूप को उपलब्ध करा रही है। भविष्य में पश्चिम बंगाल में भी हिमदर्शन धूप उपलब्ध कराया जाएगा।

हिम दर्शन धूप शुद्ध सुगंधित एवं बाजार मूल्य से बहुत ही कम दाम पर उपलब्ध है। इसका मूल्य 10रु मात्र रखा गया है। हिमदर्शन धूप का बड़ा पैकेट जिसको फैमिली पैक भी कहा जाता है 50रु, 100रु और 120रु की कीमत पर उपलब्ध है। अंत में जोशी एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाते हैं, ‘‘हम चाहते हैं कि यह आयुर्वेदिक प्राकृतिक धूप पूरे भारत में फैले, लोग केमिकल वाले धूप को जला रहे हैं और भगवान को पूजते समय खुद अस्वस्थ हो रहे हैं। हिमदर्शन धूप हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है।

सीपी जोशी और उनके सहयोगियों की इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने शहरों का मोह छोड़कर न सिर्फ अपने गांव लौटने का फैसला किया बल्कि वहां स्वरोजगार भी विकसित किया। उनका उद्यम हिमदर्शन इंटरप्राइजेज का सफलता की नई मिसाल बन रहा है। हिमदर्शन धूप की डिलरशिप व वितरण हेतु 9719291177 पर संपर्क किया जा सकता है।

 







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