by - Praveen Bhatt

06 Jul 2020


साहित्य

डॉ. नंद किशोर हटवाल

कौ सुआ, कथ कौ। ये किताब है 80 वर्षां में फैली कुमाउनी भाषा की कथायात्रा की। यह जानना सुखद है कि कुमाउनी की पहली कहानी 30 के दशक में अल्मोड़ा से छपने वाली ‘अंचल’ पत्रिका में 1938 में छपी थी। तब से लेकर 2018 तक छपने वाली कुमाउनी की कहानियां इस किताब में संग्रहीत हैं। ये पहली बार है जब कोई किताब कुमाउनी भाषा की कहानियों के इतने बड़े कालखण्ड को अपने में समेटे है। लगभग 456 पृष्ठों में फैली इस कथायात्रा को हम 1938 से 2018 तक 80 वर्षों की कुमाउनी भाषा की कथायात्रा के रूप में भी देख सकते हैं और 80 वर्ष, 100 लेखक और 100 कहानियां, यह भी इसका एक रूप है। कहानियां कालक्रमानुसार गूंथी गई है और जाहिर है इन कहानियां के माध्यम से हम एक बड़े कालखण्ड में कुमाउनी कथासाहित्य में आये विविध बदलावों का जायजा ले सकते हैं।

किताब की भूमिका और सम्पादकीय महज औपचारिक न होकर कुमाउनी भाषा के कथासाहित्य पर प्रकाश डालने वाले महत्वपूर्ण आलेख हैं। पुस्तक में इस कालावधि में कुमाउनी भाषा में कथालेखन में सक्रिय कथाकारों का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया है। इसमें बहुत सारे ऐसे कथाकारों की कहानियां भी पढ़ने को मिलेंगी जिन्हें हम हिंदी के रचनाकार के रूप में जानते हैं लेकिन इस संग्रह से ज्ञात होता है कि उन्होंने कुमाउनी में भी लिखा और लिखते हैं। इससे पूर्व ‘हुँगरा’ पुस्तक में गढ़वाली भाषा की 100 वर्ष 100 लेखक 100 कथाओं के रूप में एक शदी की कथायात्रा दर्ज है। इन दोनो ग्रंथों को उत्तराखण्ड की दो महत्वपूर्ण भाषाओं के कथा साहित्य के इतिहास से लेकर वर्तमान की एक झलक को पाठकों के समक्ष रखने वाले कामयाब प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

कौ सुआ, कथ कौ पुस्तक के आदरणीय सम्पादक मथुरादत्त मठपाल जी को इस उम्र में इस श्रमसाध्य कार्य को करके के लिए बधाई और शुभकामनाएं जैसी औपचारिकताएं बहुत छोटी हो जाएंगी। उनकी इस उर्जा और समर्पण के समक्ष नत हूं। प्रकाशक समय-साक्ष्य को इस प्रकार के महत्वपूर्ण साहित्य को प्रकाशित करने के लिए तो बधाई बनती है। इस पुस्तक का मूल्य केवल 445रूपये रखा गया है जोकि इस भारी भरकम सामग्री के लिए न्यायोचित है। इस पुस्तक को निश्चित ही पढ़ा जाना चाहिए। पुनः मेरी शुभकामनाएं। इस किताब को घर बैठे ही बुक पार्सल से प्राप्त किया जा सकता है। जिसके लिए आप मो0 7579243444 पर संपर्क या व्हाटसप कर सकते हैं।







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