by - Praveen Bhatt

23 Mar 2020


उत्तराखंड

कोरोना वॉयरस के डर अब उत्तराखंड में भी हावी हो गया है। हालांकि अभी तक 5 मामले भी सामने नहीं आए हैं लेकिन इसकी दहशत साफ दिखाई देने लगी है। शेष लोगों की बात तो दूर अब पत्रकार भी घरों से निकलने से डर रहे हैं। कुछ पत्रकार तो यहां तक कह रहे हैं कि जब सब कुछ बन्द है तो पहाड़ों की ओर निकलते हैं। इस समय केवल पुलिस और स्वास्थ्यकर्मी ही हैं जो अपने-अपने तरीके से इस वॉयरस का मुकाबला करने की कोशिश कर रहे हैं। अकेले देहरादून शहर में एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों स्थानों पर पुलिस चैक पोस्ट व नाके बनाये गए हैं जहां निजी वाहनों से गुजर रहे नागरिकों से भी सख्त पूछताछ की जा रही है। पलायन एक चिंतन द्वारा आयोजित डाकर नामक पदयात्रा जोकि 17 मार्च को कोटद्वार से शुरू हुई इसका समापन 21 मार्च को शीला बांघाट, सतपुली में हुआ। स्थिति यहां तक खराब हुई कि प्रधानमंत्री के आह्वान के कारण यात्री दल 22 मार्च के दिन बांघाट में ही रुका रहा। लेकिन फिर राज्य सरकार ने 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। ऐसे में यात्रीदल को 22 मार्च की देर रात ही मुश्किलों के बीच देहरादून पहुंचना पड़ा। लोगों ने सरकार के इस 10 दिवसीय लॉकडाउन का स्वागत किया है। देहरादून में लोग बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से निकल रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर के पल्टन बाजार, दर्शन लाल चौक, तहसील चौक, राजपुर रोड सहित सभी प्रमुख बाजार पूरी तरह से बन्द रहे। यहां तक पिं्रटिंग और प्रकाशन के कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने भी इस लॉकडाउन का स्वागत किया है। केवल मेडिकल स्टोर और कुछेक जनरल स्टोर ही खुले हैं। कुछ स्थानों से यह भी यह खबरें मिल रही हैं कि पुलिस ने बिना कारण घर से निकल रहे लोगों के वाहन सीज करने की कार्यवाही भी की है। उत्तराखंड की आम जनता सरकार कोरोना वॉयरस से लड़ने की इस पहल का समर्थन कर रही है। ऐसे में सरकार को भी और तत्पर होकर इस बीमारी से लड़ने के अधिक व्यववारिक उपाय सामने रखने होंगे। बहरहाल जनता सरकार के साथ खड़ी है।







LEAVE A REPLY

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Captcha Code :

RECENT POSTS