by - Praveen Bhatt

15 Nov 2019


उत्तराखंड

शिक्षण के प्रति शिक्षकों के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा निष्ठा कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले 38106 शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक राज्य में केआरपी और वीआरपी के रूप में कुल 318 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे इस कार्यक्रम में डायट के माध्यम से प्रशिक्षण दिए जाएंगे। 8 नवम्बर को निष्ठा के तहत प्रारम्भिक विद्यालय प्रमुखों एवं अध्यापकों का द्वितीय चरण का प्रशिक्षण सम्पन्न हो गया है। इसका प्रथम चरण 29 अक्टूबर 2019 से 2 नवम्बर 2019 तक चला तथा दूसरा चरण 4 नवम्बर से प्रारम्भ हुआ।इस कार्यक्रम में शिक्षण में विभिन्न मुद्दों एवं 21वीं सदी के जीवन कौशलों पर बल दिया गया । होटल पर्ल एवेन्यू, रिंग रोड़, देहरादून में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में प्रथम तीन दिनो में विद्यालयों में स्वास्थ्य व कल्याण, कलात्मक गतिविधियों द्वारा समेकित रूप से सीखना, भाषा शिक्षण, सूचना सम्प्रेषण तकनीकी का प्रयोग पाठ्यचर्या एवं विद्यालयी शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्रमों पर एन.सी.ई.आर.टी. नई दिल्ली के विषय विशेषज्ञों द्वारा अभिनय, चर्चा-परिचर्चा, नाटक और अन्य कलात्मक गतिविधियाँ जैसे कठपुतली, गीत-संगीत आदि का प्रशिक्षण के दौरान प्रयोग किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्याख्यान के स्थान पर आनन्ददायी वातावरण में रोचक गतिविधियों के माध्यम से पठन-पाठन के नये तरीकों को प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला के अंतिम दो दिनो में  स्कूल प्रमुखों  और शिक्षकों को विद्यालयी नेतृत्व की बारीकियों से परिचित कराया गया। इसके अंतर्गत एन0सी0ई0आर0टी0 विशेषज्ञों द्वारा विद्यालयी नेतृत्व, सीखने-सिखाने में विद्यालयी नेतृत्व की भूमिका, शिक्षण में जेण्डर विषयक मुद्दों के साथ ही पूर्व व्यावसायिक शिक्षा और राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर संचालित विद्यालयी शिक्षा से सम्बन्धित कार्यक्रम जैसे-स्वच्छ भारत अभियान, पढ़े  भारत, बड़े भारत, समग्र शिक्षा, रंगोत्सव, पुस्तकालय, आत्मरक्षा, स्कूल सुरक्षा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित प्रावधान आदि पर सत्र चलाये गये। बतौर विशेषज्ञ एन.सी.ई.आर.टी., नीपा और क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के प्रोफेसर अनूप कुमार राजपूत, अपर्णा पाण्डे, उषा शर्मा, आयुष्मान गोस्वामी, रामबाबू पारीख, सौरभ मिश्रा, सी.वी. शिम्रे, वारदा एम. निकाल्जे, आर.के. पाठक, अश्वनि कुमार गर्ग, सुनीता चुघ, रूचि शुक्ला, रितु चन्द्रा आदि ने प्रशिक्षण दिया।प्रशिक्षण के समापन सत्र में  निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण श्रीमती सीमा जौनसारी ने एन0सी0ई0 आर0टी0 के विशेषज्ञों और समस्त प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशलों का शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों द्वारा प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस निष्ठा के साथ एन.सी.ई.आर.टी. के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया, उसी निष्ठा के साथ आप लोग भी जनपदों में प्रशिक्षण देंगे। प्रोफेसर अपर्णा पाण्डे ने कहा कि हमें विद्यालयों में आनन्दमय शिक्षण की संस्कृति का विकास करना है। उन्होंने मैन्टरिंग और मॉनीटरिंग की बात की तथा बच्चों की सोच में प्रशिक्षण के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने पर जोर दिया। प्रो0 गोस्वामी ने कहा कि इस कार्यक्रम के केन्द्र में बच्चे हैं। वे फूल हैं तथा प्रशिक्षणों के माध्यम से हमें उन फूलों को खिलने का अवसर देना है। कुलदीप गैरोला, संयुक्त निदेशक ने कहा कि निष्ठा कार्यक्रम एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है तथा इसको जनपदों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी अब राज्य सन्दर्भ समूह की है। अपर निदेशक एस0सी0ई0आर0टी0 श्री अजय कुमार नौडियाल ने प्रशिक्षण को शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप बताया। अन्त में संयुक्त निदेशक, कंचन देवराड़ी ने सबका धन्यवाद देते हुए कहा कि एन.सी.ई.आर.टी. के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करना हमारे लिए एक बेहतरीन अवसर है। उन्होंने प्रशिक्षण में के0आर0पी0 और एस0आर0पी0 की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। समापन सत्र का संचालन डॉ0 मोहन बिष्ट ने किया। प्रशिक्षण के अन्तिम दिन कार्यक्रम समन्व्यक मनोज कुमार शुक्ला द्वारा ऑनलाईन प्रशिक्षण का पोस्ट एसेसमेन्ट करवाया गया। सभी प्रतिभागियों ने ग्रुपवार अपने विषयों से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गतिविधियाँ दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में समन्वयक के रूप में एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड के उप निदेशक, हिमानी बिष्ट, उप निदेशक, राय सिंह रावत, सहायक निदेशक, मनोरमा बर्त्वाल, डॉ0 कृष्णानन्द बिजल्वाण, डॉ0 साधना डिमरी, रमेश पंत, देवराज राणा, रेनू चौहान, राजेश खत्री, दिनेश चौहान, एस.पी. वर्मा, डॉ0 दिनेश रतूड़ी, किशोर पंवार, कुलबीर सजवाण, हिमानी भट्ट उपस्थित थे।







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