by - praveen bhatt

02 Aug 2019


उत्तराखंड

आठ दिनों तक चले संघर्ष के बाद आखिरकार सरकार बैकफुट पर चली गई और सूचना विभाग के माध्यम से पत्रकारों की सभी मांगों को मानने का ऐलान कर दिया। दरअसल उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रिंट व वेबमीडिया से जुड़े पत्रकार अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। बीते रोज पत्रकारों ने देहरादून के ही गांधी पार्क से लेकर घंटाघर तक मशाल जुलूस भी निकाला था। यहां तक कि आन्दोलन को तेज करते हुए 2 अगस्त से पत्रकारों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था। अनशन में सबसे पहले संजीव पन्त बैठे। इस अनशन से धबराई सरकार ने अनशन के पहले ही दिन पत्रकारों की मांगों को मानने का ऐलान कर दिया। हालांकि इससे पहले की इस आन्दोलन की गूंंज उत्तराखंड के सभी जिलों सहित दिल्ली तक पहुंच चुकी है। उत्तराखंड सूचना विभाग की मनमानियों के खिलाफ चल रहा आंदोलन सरकार द्वारा सभी मांगे मान लिए जाने तथा खेद व्यक्त करने के बाद स्थगित हुआ। उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के पत्रकारों ने एक अगस्त को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित सूचना विभाग को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और चेताया था कि यदि पत्रकारों की 11 सूत्रीय मांगे नहीं मानी गई तो 2 अगस्त को 11ः00 बजे से पत्रकार आमरण अनशन शुरू कर देंगे।वरिष्ठ पत्रकार संजीव पंत आज सुबह 11ः00 बजे से आमरण अनशन पर बैठ गए थे तथा उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार जीतमणि पैन्यूली क्रमिक अनशन तथा मौन व्रत पर बैठ गए थे। हालांकि अल्टीमेटम के साथ ही कल एक अगस्त को ही सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई थी और आनन-फानन में ज्ञापन में दी गई मांगों पर वर्कआउट शुरू कर दिया गया था। आज लगभग 1ः30 बजे उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल चंदोला तथा अपर निदेशक राजेश कुमार धरना स्थल पर आए तथा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पत्रकारों को आश्वस्त कराया और डॉक्टर अनिल चंदोला ने ज्ञापन में लिखी एक एक मांग पत्रकारों के सामने पढ़कर सुनाते हुए प्रत्येक पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश पर आज सुबह से ही कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। डॉ अनिल चंदोला ने सबसे पहले अमर शहीद श्रीदेव सुमन की जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि व्यक्त करने वाला विज्ञापन स्थानीय अखबारों को न दिए जाने पर खेद व्यक्त किया और इसे एक चूक मानते हुए इसकी प्रतिपूर्ति शीघ्र कराने का आश्वासन दिया। साथ ही आश्वस्त किया कि पत्रकारों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा पत्रकारों को विश्वास में लिए बिना नियमावली में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। जनता ने कहा कि नई नियमावली को फिलहाल रोक दिया गया है। डॉक्टर अनिल चंदोला ने बताया कि न्यूज़ पोर्टल के एंपैनलमेंट की कार्यवाही तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है, तथा आज ही एंपैनलमेंट के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं। इसके अलावा डॉ. अनिल चंदोला ने बताया कि वेब पोर्टल के पत्रकारों को भी मान्यता की दायरे में लाने के लिए फाइल चला दी गई है। साथ ही श्री चंदोला ने जानकारी दी कि कल ही पत्रकारों के लंबित पेंशन प्रकरणों और कल्याण योजनाओं पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसके अलावा डॉक्टर चंदोला ने सहमति व्यक्त की कि गूगल को  कोई ऐड नहीं दिए जाएंगे। केवल वेब पोर्टल को ही विज्ञापन जारी किए जाएंगे। डॉ अनिल चंदोला ने कहा कि सभी मांगो पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है तथा 1 महीने के अंदर अंदर सभी मांगें मूर्त रूप धारण कर लेगी। उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पत्रकारों को भी संभवत एहसास नहीं रहा होगा कि सरकार इतनी आसानी से उनकी मांगे मान लेगी। लेकिन पत्रकारों की एकजुटता के आगे सरकार ने एक हफ्ते में ही घुटने टेक दिए। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के हौसले बुलंद हैं। मांगे मान लिए जाने पर पत्रकारों ने खुशी जताई और सूचना विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया तथा साथ ही चेताया कि 1 महीने बाद इन मांगों पर हुए कार्यों का विश्लेषण किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।







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